ना कुरआन पढ़ते हो
ना गीता को पढ़ते हो
बताओ दोस्तों आखिर
तुम किस बात लड़ते हो
अगर गीता को पढ़ लेते
अगर कुरआन पढ लेते
सलीका सीख जाते तुम
ना यूँ बिन बात लड़ जाते
हज़ारों ख्वाहिशें रखते हो
तो ये बात भी रखलो
भरोसा हिन्द का रखलो
सरे इंसान का रखलो ।
---- राहुल गुप्ता
प्रहार
गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013
इंसान
शुक्रवार, 16 अगस्त 2013
खंज़र
गाढ़े हैं किसने देखिये, खंज़र ज़मीन पर |
बिखरे पड़े हैं खून के, मंज़र ज़मीन पर |
वो अज्म, वो हौसला किसी में नहीं मिला,
आया था एक बार ही सिकंदर ज़मीन पर |
बिखरे पड़े हैं खून के, मंज़र ज़मीन पर |
वो अज्म, वो हौसला किसी में नहीं मिला,
आया था एक बार ही सिकंदर ज़मीन पर |
ज़मी से आसमां
ज़मी से आसमां तक साज़ की आवाज़ जाती है ,
मगर ये शर्त है की साज़ को दिल से बजाना है |
गुल की गुलशन की गुलिस्तान की बातें ।
आओ हम फिर से करें हिदुस्तान की बातें ।
जलाकर दूसरों के घर को जो रोटी पकाता हो
कभी वो कर नहीं सकता नखलिस्तान की बातें ।
है जिसका काम गद्दारी वो गद्दारी ही करता है
अरे छोडो गिले शिकवे ये पाकिस्तान की बातें ।
सिनेमा का ज़माना है वही सब याद रहता है
भुला बैठे अलिफ़ लैला बहारिस्तान की बातें ।
गरीबी भुखमरी पै एक जैसी ही सियासत है
करो मुंबई की या के दोस्तों मुल्तान की बातें ।
मगर ये शर्त है की साज़ को दिल से बजाना है |
गुल की गुलशन की गुलिस्तान की बातें ।
आओ हम फिर से करें हिदुस्तान की बातें ।
जलाकर दूसरों के घर को जो रोटी पकाता हो
कभी वो कर नहीं सकता नखलिस्तान की बातें ।
है जिसका काम गद्दारी वो गद्दारी ही करता है
अरे छोडो गिले शिकवे ये पाकिस्तान की बातें ।
सिनेमा का ज़माना है वही सब याद रहता है
भुला बैठे अलिफ़ लैला बहारिस्तान की बातें ।
गरीबी भुखमरी पै एक जैसी ही सियासत है
करो मुंबई की या के दोस्तों मुल्तान की बातें ।
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