शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

खंज़र

गाढ़े हैं किसने देखिये, खंज़र ज़मीन पर |
बिखरे पड़े हैं खून के, मंज़र ज़मीन पर |
वो अज्म, वो हौसला किसी में नहीं मिला,
आया था एक बार ही सिकंदर ज़मीन पर |

ज़मी से आसमां

ज़मी से आसमां तक साज़ की आवाज़ जाती है ,
मगर ये शर्त है की साज़ को दिल से बजाना है |





गुल की गुलशन की गुलिस्तान की बातें ।
आओ हम फिर से करें हिदुस्तान की बातें ।

जलाकर दूसरों के घर को जो रोटी पकाता हो
कभी वो कर नहीं सकता नखलिस्तान की बातें ।

है जिसका काम गद्दारी वो गद्दारी ही करता है
अरे छोडो गिले शिकवे ये पाकिस्तान की बातें ।

सिनेमा का ज़माना है वही सब याद रहता है
भुला बैठे अलिफ़ लैला बहारिस्तान की बातें ।

गरीबी भुखमरी पै एक जैसी ही सियासत है
करो मुंबई की या के दोस्तों मुल्तान की बातें ।